History

इतिहास का अध्ययन कैसे करें? भारतीय इतिहास का काल विभाजन एवं मार्क्सवादी दृष्टिकोण

August 31, 2026 Sonu 1 min read

इतिहास :

इतिहास अतीत एवं वर्तमान के बीच निरंतर संवाद का नाम है

इतिहास का अध्ययन कैसे करें ?

इतिहास के अध्ययन का अर्थ केवल तथ्यों का संकलन नहीं है। बल्कि इतिहास के अध्ययन का वास्तविक अर्थ राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में परिवर्तन के तत्वों को रेखांकित करना है। जहां तक तथ्यों का सवाल है, तो वे महज उन ऐतिहासिक परिवर्तनों के उदाहरण प्रस्तुत करते हैं

भारतीय इतिहास के विभाजन का आधार एवं प्रमुख दृष्टिकोण

1. जेम्स मिल का औपनिवेशिक काल विभाजन

भारत का पहला व्यवस्थित इतिहास एक ब्रिटिश लेखक जेम्स मिल ने लिखा था। उसने भारतीय इतिहास को तीन मुख्य कालों में विभाजित किया:

  • हिन्दू काल
  • मुस्लिम काल
  • ब्रिटिश काल

समीक्षा: जेम्स मिल द्वारा किए गए इस विभाजन का आधार और काल निर्धारण दोनों ही गलत थे, क्योंकि यह विभाजन केवल शासक वर्ग के धर्म पर आधारित था और इसमें सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों की उपेक्षा की गई थी

2. राष्ट्रवादी इतिहासकारों का दृष्टिकोण

आगे चलकर भारत के राष्ट्रवादी इतिहासकारों ने जेम्स मिल द्वारा दिए गए हिन्दू काल, मुस्लिम काल और ब्रिटिश काल जैसे सांप्रदायिक नामों को बदल दिया। उनके स्थान पर नए नाम रखे गए:

  • प्राचीन काल
  • मध्य काल
  • आधुनिक काल

यद्यपि राष्ट्रवादी इतिहासकारों ने नाम बदल दिए, परंतु विभाजन का पुराना आधार ही बना रहा—अर्थात मोहम्मद गौरी के आक्रमण के साथ मध्य युग का आरंभ मानना

3. मार्क्सवादी इतिहास लेखन एवं ‘पूर्व-मध्य काल’ की अवधारणा

मार्क्सवादी इतिहास लेखन ने जेम्स मिल और प्रारंभिक राष्ट्रवादी काल विभाजन को चुनौती दी और ‘पूर्व-मध्य काल’ की नवीन अवधारणा प्रस्तुत की:

  • इन विद्वानों के अनुसार मध्य युग के आगमन के लिए मोहम्मद गौरी के आक्रमण की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसका आरंभ भारत में सामंतवाद के उद्भव के साथ माना जाना चाहिए।
  • इनका तर्क है कि सामंतवाद के उद्भव के बाद ही आंतरिक कमजोरियों के कारण बाह्य आक्रमण सफल हुए, इसलिए सामंतवाद का उद्भव ही मूल परिवर्तनकारी तत्व था।
  • इस आधार को अपनाते हुए प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. आर. एस. शर्मा (R. S. Sharma) ने 750 ईस्वी से 1200 ईस्वी के बीच के काल को पूर्व-मध्य काल का नाम दिया है, तथा 1200 ईस्वी के बाद के काल को उत्तर-मध्य काल कहा है।

4. आधुनिक काल के संदर्भ में बदलती अवधारणा

पूर्व में 1757 ईस्वी के प्लासी के युद्ध के साथ आधुनिक काल की शुरुआत मानी जाती थी। परंतु इस संदर्भ में एक नया दृष्टिकोण उभरकर आया कि केवल प्लासी के युद्ध से कोई आमूलचूल परिवर्तन नहीं हुआ था। बल्कि इससे पूर्व यूरोपीय कंपनियों के आगमन के पश्चात भारत में बड़ी मात्रा में कीमती धातुएं आ रही थीं। अतः इस काल को ‘पूर्व-आधुनिक काल’ माना गया, जबकि भारत में प्रत्यक्ष ब्रिटिश शासन की स्थापना के बाद के काल को पूर्ण ‘आधुनिक काल’ की संज्ञा दी गई

भारतीय इतिहास का सर्वमान्य कालखंड वर्गीकरण

उपर्युक्त विश्लेषण के आधार पर भारतीय इतिहास को निम्नलिखित कालखंडों में बांटकर देखा जाता है:

  • प्राचीन काल: आरंभिक मानव के काल से लेकर 750 ईस्वी तक
  • पूर्व मध्य काल: 750 ईस्वी से 1200 ईस्वी तक
  • उत्तर मध्य काल (सल्तनत काल): 1200 ईस्वी से 1526 ईस्वी तक
  • पूर्व-आधुनिक काल (मुगल काल): 1526 ईस्वी से 1757 ईस्वी तक
  • आधुनिक काल: 1757 ईस्वी के बाद (ब्रिटिश शासन एवं राष्ट्रीय आंदोलन)

ऐतिहासिक परिवर्तन के अध्ययन का क्षैतिज क्रम

इतिहास में होने वाले क्रमिक बदलावों को समझने के लिए निम्नलिखित क्षैतिज परिवर्तन (Horizontal Change) की कड़ी को समझना आवश्यक है:

जलवायु संबंधी परिवर्तनतकनीकी परिवर्तनजीविकोपार्जन परिवर्तनसामाजिक परिवर्तनसांस्कृतिक परिवर्तन

इस अध्ययन पद्धति के अंतर्गत इतिहास के प्रत्येक कालखंड को चार मुख्य आयामों में विभाजित कर विश्लेषित किया जाता है:

  1. राजनीतिक आयाम: क्षेत्रीय विस्तार एवं प्रशासनिक संरचना।
  2. आर्थिक आयाम: कृषि, शिल्प व उद्योग, व्यापार, मुद्रा व्यवस्था तथा नगरीकरण।
  3. सामाजिक आयाम: वर्ण एवं जाति व्यवस्था, आश्रम, संस्कार तथा समाज के विभिन्न वर्गों (महिलाओं, शूद्रों आदि) की स्थिति।
  4. सांस्कृतिक आयाम: धर्म, दर्शन, भाषा एवं साहित्य, कला, स्थापत्य तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी।

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