1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं भौगोलिक विस्तार (Historical & Geographical Context) 2. दुर्गों का शास्त्रीय वर्गीकरण (Classical Classification of Forts) प्रतियोगी परीक्षाओं (विशेषतः RAS एवं UPSC) के दृष्टिकोण से…
1. करणी माता (देशनोक, बीकानेर) 2. जीण माता (रेवासा, सीकर) 3. कैला देवी (त्रिकूट पर्वत, करौली) 4. शीला देवी (आमेर दुर्ग, जयपुर) 5. शीतला माता (सील की डूंगरी,…
1. प्रस्तावना: प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला की पृष्ठभूमि प्राचीन भारतीय कला एवं स्थापत्य केवल सौंदर्यबोध का माध्यम नहीं था, बल्कि यह तत्कालीन राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और दार्शनिक परिस्थितियों…
1. परिचय और पॉडकास्ट का सार (Introduction & Core Essence) राज शमानी और स्टैनफोर्ड के न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. एन्ड्रयू ह्यूबर्मन के बीच हुई यह बातचीत हेल्थ से कहीं ज्यादा…
1. प्रस्तावना: प्राचीन भारत में धार्मिक चेतना का विकास प्राचीन भारत का धार्मिक इतिहास स्थिर सिद्धांतों का संग्रह नहीं था, बल्कि यह सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं के साथ निरंतर विकसित…
1. प्रस्तावना: प्राचीन भारत में साम्राज्य निर्माण की प्रक्रिया प्राचीन भारतीय राजनीतिक इतिहास क्षेत्रीय राज्यों से अखिल भारतीय साम्राज्यों के उत्थान, विघटन और पुनर्गठन की एक निरंतर यात्रा…
1. इतिहास की संकल्पना एवं काल विभाजन का वैज्ञानिक आधार इतिहास अतीत एवं वर्तमान के बीच निरंतर संवाद का नाम है। इसके अध्ययन का वास्तविक अर्थ केवल ऐतिहासिक…
1. प्रस्तावना: बौद्धिक क्रांति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि छठी शताब्दी ईसा पूर्व का काल प्राचीन भारतीय और वैश्विक इतिहास में अभूतपूर्व वैचारिक मंथन का युग था। बौद्धिक क्रांति से…
राजस्थान में भक्ति आंदोलन केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सामाजिक कुरीतियों, बाह्य आडंबरों, जातिगत संकीर्णताओं और ऊंच-नीच के भेदभाव के विरुद्ध एक सशक्त सांस्कृतिक…
1. ‘पंचपीर’ की दार्शनिक व सांस्कृतिक अवधारणा 2. पंचपीरों का विस्तृत एवं सूक्ष्म विश्लेषण (A) बाबा रामदेवजी तंवर (सांप्रदायिक सद्भाव एवं समाज-सुधार के प्रतीक) (B) पाबूजी राठौड़ (गौ-रक्षक,…