Economy

सकल घरेलू उत्पाद (GDP – Gross Domestic Product)

August 30, 2026 Sonu 1 min read

अर्थव्यवस्था के लिए GDP क्यों महत्वपूर्ण है ?

किसी भी अर्थव्यवस्था के निष्पादन (Performance) की जाँच के लिए मुख्य रूप से 2 प्रकार के संकेतक होते हैं:

  • सामाजिक संकेतक: जैसे मानव विकास सूचकांक (HDI), वैश्विक भुखमरी सूचकांक (GHI) इत्यादि।
  • आर्थिक संकेतक: जैसे GDP, प्रति व्यक्ति आय, GNP इत्यादि।

अर्थव्यवस्था के आर्थिक निष्पादन की जांच के लिए आर्थिक संकेतक अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। आर्थिक संकेतकों में भी GDP को सबसे महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. तुलनात्मक अध्ययन: जब 2 या 2 से अधिक एक समान अर्थव्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है, तो उसमें GDP सबसे उपयुक्त कारक होता है (जैसे- BRICS देश)।
  2. समयांतराल विश्लेषण: किसी भी अर्थव्यवस्था के विभिन्न समय अंतराल में तुलनात्मक अध्ययन के लिए GDP सबसे महत्वपूर्ण होता है (जैसे- भारत की अर्थव्यवस्था LPG सुधार के पहले और बाद में, या कोरोना महामारी से पहले और बाद में)।
  3. नीतियों का मूल्यांकन: सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था में किए गए विभिन्न सुधारों का मूल्यांकन GDP द्वारा किया जा सकता है (जैसे- वर्ष 2017 में GST को लागू करना)।

GDP क्या है? (परिभाषा)

—>किसी भी अर्थव्यवस्था मे एक वित्तीय वर्ष मे देश की घरेलू सीमा मे उत्पादित अंतिम वस्तु एवं सेवा का मौद्रिक मूल्य, सकल घरेलू उत्पाद कहलाता है। परिभाषा: किसी भी अर्थव्यवस्था में एक वित्तीय वर्ष में देश की घरेलू सीमा के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य, ‘सकल घरेलू उत्पाद’ (GDP) कहलाता है।”

GDP को बेहतर ढंग से समझने के लिए इसके मुख्य घटकों को समझना आवश्यक है:

1. वित्तीय वर्ष (Financial Year)

1996 से भारत में GDP की गणना तिमाही आधार (Quarterly basis) पर की जाती है। एक वित्तीय वर्ष में 4 तिमाही होती हैं:

  • Q1: अप्रैल से जून
  • Q2: जुलाई से सितंबर
  • Q3: अक्टूबर से दिसंबर
  • Q4: जनवरी से मार्च

2. घरेलू सीमा (Domestic Territory)

घरेलू सीमा हमेशा भौगोलिक सीमा से व्यापक होती है। घरेलू सीमा = भौगोलिक सीमा + विदेशों में दूतावास + समुद्री सीमा + विदेशों में स्थित सैन्य अड्डा

3. अंतिम वस्तु और सेवा (Final Goods and Services)

  • वस्तु: जो दृश्य (Visible) होती है और जिसका बाजार मूल्य होता है।
  • सेवा: जो अदृश्य (Invisible) हो और जिसका बाजार मूल्य हो।

वस्तु 3 प्रकार का –

  • मध्यवर्ती वस्तु: इसे कच्चा माल भी कहा जाता है (जैसे- गन्ने से चीनी बनाने में गन्ना मध्यवर्ती वस्तु है)।
  • पुरानी वस्तु: वह जिसे बाजार में पुनः विक्रय किया जाये (प्रयोग के बाद, जैसे- पुरानी कार)।

नोट: GDP में मध्यवर्ती और पुरानी वस्तुओं को शामिल नहीं किया जाता है क्योंकि यह दोहरी गणना (Double Counting) को बढ़ावा देता है। GDP में केवल अंतिम वस्तु और सेवा को शामिल करते हैं।

अंतिम वस्तु: अंतिम वस्तु वह होती है:

  1. जिसका बाजार मूल्य हो,
  2. जिसमें मूल्य वर्धन (Value Addition) ना हो, और
  3. जो सीधे उपयोग या उपभोग में आए। उदाहरण: गन्ने से बनी चीनी (अंतिम वस्तु)।

मूल्य वर्धन (Value Addition) = अंतिम वस्तु का मूल्य – मध्यवर्ती वस्तु का मूल्य (उदाहरण: गन्ना 10 रुपये, चीनी 40 रुपये → मूल्य वर्धन = 40 – 10 = 30 रुपये)

4. मौद्रिक मूल्य (Monetary Value)

मौद्रिक मूल्य को बाजार मूल्य (Market Price) कहा जाता है। बाजार मूल्य = कारक लागत (Factor Cost) + अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) – सब्सिडी (Subsidy)

  • GDP की गणना हमेशा बाजार मूल्य में की जाती है।
  • वर्ष 2015 से पहले GDP की गणना कारक लागत में होती थी, जबकि 2015 के बाद से इसे बाजार मूल्य में किया जाता है।
  • GDP एक भौगोलिक अवधारणा है, अर्थात जिस भी वस्तु और सेवा का उत्पादन देश की घरेलू सीमा के भीतर हो, भले वह देश के नागरिक या विदेशी द्वारा उत्पादित हो, उसे GDP में शामिल किया जाता है।
  • विदेशों में निर्यात की गई वस्तु और सेवा को GDP में शामिल किया जाता है (क्योंकि उत्पादन घरेलू सीमा में हुआ है)।
  • विदेशों से आयात की गई वस्तु और सेवा को GDP में शामिल नहीं किया जाता है (क्योंकि उत्पादन घरेलू सीमा के बाहर हुआ है)।

भारत में GDP की गणना (Calculation of GDP in India)

भारत में GDP की गणना तिमाही आधार पर NSO द्वारा की जाती है।

NSO (राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय – National Statistical Office)

  • स्थापना: 2019
  • मुख्यालय: नई दिल्ली
  • मंत्रालय: MOSPI (सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय – Ministry of Statistics and Programme Implementation)

MOSPI मंत्रालय में पूर्व में 2 कार्यालय थे:

  1. CSO (केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय – Central Statistical Office):
    • स्थापना: 1951
    • मुख्यालय: नई दिल्ली (क्षेत्रीय मुख्यालय: कोलकाता)
    • कार्य: यह मुख्य रूप से मुद्रास्फीति, GDP, राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक इत्यादि की गणना करता था।
  2. NSSO (राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय – National Sample Survey Office):
    • स्थापना: 1950
    • मुख्यालय: कोलकाता (क्षेत्रीय मुख्यालय: नई दिल्ली)
    • कार्य: गरीबी, बेरोजगारी, असंगठित क्षेत्र, कृषि जोत का सर्वे इत्यादि।

महत्वपूर्ण तथ्य: वर्ष 2019 में CSO और NSSO का विलय करके NSO को स्थापित किया गया। (नोट: भारत में रोजगार की गणना श्रम मंत्रालय के श्रम विभाग द्वारा की जाती है।)

GDP की गणना का आधार वर्ष (Base Year for GDP)

आधारर वर्ष को गणना का आधार माना जाता है आधार वर्ष का प्रयोग मुद्रास्फीति के प्रभाव को समाप्त करने के लिए किया जाता है। इसलिए आधार वर्ष के मूल्य को ‘वास्तविक मूल्य’ कहा जाता है। किसी भी वर्ष को आधार वर्ष के रूप में चयन करने के लिए निम्न 3 शर्तों को पूरा करना होता है:

  1. वह वर्ष एक ‘सामान्य वर्ष’ होना चाहिए।
  2. उस वर्ष में समष्टि अर्थशास्त्र (Macroeconomics) के सभी आंकड़े उपलब्ध होने चाहिए।
  3. यह वर्ष न तो अधिक पुराना होना चाहिए और न ही वर्तमान वर्ष के बहुत करीब होना चाहिए। (आधार वर्ष स्थायी नहीं होना चाहिए।)

वर्तमान स्थिति: वर्तमान में GDP का आधार वर्ष 2011-12 है, जिसे वर्ष 2015 से शुरू किया गया था। जल्द ही सरकार GDP के आधार वर्ष को बदलकर 2017-18 करना चाहती है।

मौद्रिक GDP बनाम वास्तविक GDP (Nominal vs Real GDP)

GDP की गणना 2 मूल्यों में की जाती है:

  1. वर्तमान वर्ष के मूल्य में (चालू मूल्य): चालू मूल्य में GDP की गणना को मौद्रिक GDP (Nominal GDP) कहा जाता है।
  2. आधार वर्ष के मूल्य में (स्थिर मूल्य): स्थिर मूल्य में GDP की गणना को वास्तविक GDP (Real GDP) कहा जाता है।
  • मौद्रिक GDP में मुद्रास्फीति का प्रभाव शामिल होता है, जबकि वास्तविक GDP में मुद्रास्फीति का प्रभाव शामिल नहीं होता है।
  • मौद्रिक GDP – वास्तविक GDP = मुद्रास्फीति का प्रभाव

निष्कर्ष: मौद्रिक GDP हमेशा वास्तविक GDP से अधिक होगा। वास्तविक GDP का बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर होता है क्योंकि यह प्रदर्शित करता है कि देश में वस्तु और सेवा के वास्तविक उत्पादन में वृद्धि हो रही है। मौद्रिक GDP का बढ़ना यह सुनिश्चित नहीं करता कि उत्पादन बढ़ रहा है; यह केवल महंगाई (मूल्य में वृद्धि) के कारण भी हो सकता है।

विगत वर्ष का प्रश्न (UPSC IAS Mains)

(IAS Mains 2021) Q. भारत के सकल घरेलू उत्पाद के वर्ष 2015 के पूर्व तथा वर्ष 2015 के पश्चात परिकलन विधि मे अंतर की व्याख्या कीजिये।

उत्तर/मुख्य बिंदु:

  • GDP का आधार वर्ष 2004-2005 से बदलकर 2011-12 कर दिया गया।
  • 2015 से पूर्व GDP की गणना केवल कारक लागत (Factor Cost) में की जाती थी।
  • 2015 के पश्चात GDP की गणना कारक लागत मूल्य और बाजार मूल्य (Market Price) दोनों में की जाती है। कारक लागत मूल्य में GDP को GVA (Gross Value Added) कहा जाता है।
  • वर्ष 2015 से GDP की गणना में SNA पद्धति को अपनाया गया है।

SNA (System of National Accounts): यह GDP और राष्ट्रीय आय की गणना करने का अंतर्राष्ट्रीय मानक है, जिसे सर्वप्रथम 1992 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाया गया था (वर्ष 2008 में इसमें संशोधन भी किया गया)। वर्तमान में अमेरिका समेत विश्व के अधिकांश देश GDP की गणना में इसी पद्धति का प्रयोग करते हैं। अतः अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन करते हुए भारत सरकार द्वारा इसे वर्ष 2015 में अपना लिया गया। वर्तमान में GDP की गणना के साथ-साथ GVA की भी गणना की जाती है।

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