ब्रह्मांड की उत्पत्ति : स्थिर अवस्था सिद्धांत (Steady State Theory of Universe)

September 4, 2026 Sonu 1 min read
ब्रह्मांड एवं सौरमण्डल

ब्रह्मांड की उत्पत्ति : स्थिर अवस्था सिद्धांत (Steady State Theory of Universe)

📖 Core Summary: स्थिर अवस्था सिद्धांत ब्रह्मांड की उत्पत्ति की वह अवधारणा है जिसके अनुसार ब्रह्मांड सदैव एक समान रहा है और निरंतर नई सामग्री के सृजन से इसका घनत्व स्थिर बना रहता है। यह सिद्धांत बिग बैंग सिद्धांत का प्रमुख विकल्प था।
📌 Key Facts & Historical Provisions
  • हरमन बोंडी (Hermann Bondi), टॉम गोल्ड (Tommy Gold) तथा फ्रेड हॉयल (Fred Hoyle) ने 1948 में यह सिद्धांत प्रस्तुत किया।
  • इसके अनुसार ब्रह्मांड का कोई आरंभ या अंत नहीं है; यह सदैव विस्तार के बावजूद एक जैसा दिखता है।
  • निरंतर सृजन (Continuous Creation) की अवधारणा के तहत ब्रह्मांड में नई पदार्थ राशि (लगभग 1 हाइड्रोजन परमाणु प्रति घन मीटर प्रति अरब वर्ष) उत्पन्न होती रहती है।
  • यह सिद्धांत 'पूर्ण ब्रह्मांडीय सिद्धांत' (Perfect Cosmological Principle) पर आधारित है — ब्रह्मांड समय और स्थान दोनों में समरूप है।
  • 1965 में कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड रेडिएशन (CMBR) की खोज के बाद इस सिद्धांत को अधिकांश वैज्ञानिकों ने अस्वीकार कर दिया।
💡 Memory Hook (Mnemonic): ‘BHG स्थिर’ — Bondi, Hoyle, Gold ने दिया स्थिर अवस्था सिद्धांत (Hermann Bondi + Thomas Gold + Fred Hoyle = 1948)।
⚠️ Exam Pointers & Traps: इसे ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सिद्धांत न समझें — यह सिद्धांत ब्रह्मांड के ‘नित्य अस्तित्व’ की वकालत करता है। प्रायः बिग बैंग के साथ तुलना पूछी जाती है; ‘बिग बैंग’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम फ्रेड हॉयल ने ही इस सिद्धांत की आलोचना में किया था।

🎯 Mini Practice Quiz (Quick Recall)

Q1. स्थिर अवस्था सिद्धांत (Steady State Theory) का प्रतिपादन किसने किया था?
💡 Explanation: 1948 में बोंडी, गोल्ड और हॉयल ने मिलकर यह सिद्धांत दिया जिसमें ब्रह्मांड को शाश्वत और अपरिवर्तनीय माना गया।