खगोलीय पिंडों का गुरुत्वीय विभव (Gravitational Potential of Celestial Bodies)

September 4, 2026 Sonu 1 min read
ब्रह्मांड एवं सौरमण्डल

खगोलीय पिंडों का गुरुत्वीय विभव (Gravitational Potential of Celestial Bodies)

📖 Core Summary: किसी खगोलीय पिंड के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में इकाई द्रव्यमान को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया गया कार्य ही गुरुत्वीय विभव कहलाता है।
📌 Key Facts & Historical Provisions
  • गुरुत्वीय विभव का मान सदैव ऋणात्मक होता है क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल आकर्षण प्रकृति का होता है।
  • पिंड की सतह पर विभव का मान V = -GM/R होता है, जहाँ G सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक है।
  • यह पिंड के द्रव्यमान (M) और त्रिज्या (R) पर निर्भर करता है, जो ग्रहों के वायुमंडल को थामे रखने में सहायक है।
💡 Memory Hook (Mnemonic): V = -GM/R (विभव का मान, द्रव्यमान के समानुपाती और त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती)
⚠️ Exam Pointers & Traps: ध्यान दें कि गुरुत्वीय विभव 'अदिश राशि' (Scalar Quantity) है, सदिश नहीं।

🎯 Mini Practice Quiz (Quick Recall)

Q1. गुरुत्वीय विभव (Gravitational Potential) के संदर्भ में कौन सा कथन सत्य है?
💡 Explanation: गुरुत्वीय विभव एक अदिश राशि है, इसका मान सदैव ऋणात्मक होता है और यह V = -GM/R सूत्र द्वारा निर्धारित होता है।